*राजपूत समाज का लक्ष्य शिक्षा, संस्कार और व्यापार हो*
रोहताश सिंह चौहान, विचारक नोएडा
आज के समय में यदि किसी समाज का पतन हो रहा हैं तो वो समाज है राजपूत समाज ।कारण है राजपूत समाज का संगठित न होनाऔर एक दूसरे की मुखालपत करना ।और विशेष बात यह है कि राजपूत समाज के राजनेता कुर्सी हथियाने के बाद समाज की तरफ नही देखते । इसलिए राजनेतिक पार्टियों के नेता राजपूत समाज की अनदेखी करते है । वर्तमान परिवेश में शिक्षा और व्यापार में संकल्पित होकर अपनी योग्यता एवं वीरता का परिचय देते हुए हर युवा क्षत्रिय अपना लक्ष्य निर्धारित कर के कदम आगे बढ़ाए। और समाज में फैली कुरीतिया अशिक्षा , बेरोजगारी, दहेज प्रथा और नशा प्रवृत्ति का डटकर विरोध करे । हर क्षत्रिय युवा दृढ़ प्रतिज्ञा करे की हम जिस संस्थान में शिक्षा ग्रहण कर रहे है उसमें प्रथम के साथ एक से दस या एक से सौ के बीच रैंक अपने अन्य सभी भाइयों के साथ क्षत्रिय झंडा को गाड़ दे। तलवार से वीरता का परिचय हमारे पूर्वज बहुत दे चुके है।अब अपनी वीरता का परिचय शिक्षा, संस्कार और व्यापार में देना है।व्यापार के हर क्षेत्र में गहराई से समीक्षा करके स्वयं को स्थापित करना हैं। वर्ण आपको कोई पूछेगा नही ।
तलवार सिर्फ़ स्वाभिमान की रक्षा के लिए अंतिम विकल्प हो। दिखावे या इगो में कभी भी तलवार से वर्तमान समय में स्वयं का कल्याण या क्षत्रिय समाज का कल्याण नही हो सकता। जो नेता समाज को तलवार और बंदूक़ का पाठ पढ़ाए उस तरह के लोगों से समाज स्वयं का किनारा कर ले या उसे बोले की समाज की उन्नति के लिए बेहतर मार्ग बताए। राजपूत नौजवान गफलत के चौराहे पर खड़ा है उसे सही रास्ता बताना आपका धर्म है । जो क्षत्रिय युवा शिक्षा ग्रहण कर रहे है समाज के युवा अपने अनुभवी अभिभावक जो जीवन सफ़र में कई उतार चढ़ाव देखे हैं उन से अनुभव प्राप्त करे। और समाज की आर्थिक, सामाजिक, संस्कृति और राजनेतिक स्थिति का मंथन करें । वरना राजपूत समाज को गर्त में जाने से कोई नहीं बचा सकता ।